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mahabharat 13.117.25: प्रत्येक परिस्थिति में मनुष्य को न्यायपूर्वक अर्जित भोजन सुपात्र को अवश्य देना चाहिए, क्योंकि भोजन ही समस्त प्राणियों का परम आधार है।   |   mahabharat अध्याय 13.117: पापसे छूटनेके उपाय तथा अन्नदानकी विशेष महिमा   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 117: पापसे छूटनेके उपाय तथा अन्नदानकी विशेष महिमा  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  13.117.25 
सर्वावस्थं मनुष्येण न्यायेनान्नमुपार्जितम्।
कार्यं पात्रागतं नित्यमन्नं हि परमा गति:॥ २५॥
 
 
अनुवाद
प्रत्येक परिस्थिति में मनुष्य को न्यायपूर्वक अर्जित भोजन सुपात्र को अवश्य देना चाहिए, क्योंकि भोजन ही समस्त प्राणियों का परम आधार है।
 
In every situation, a person must offer food earned justly to a deserving person, because food is the ultimate support for all living beings. 25.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)