Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.117.22: जो मनुष्य न्यायपूर्वक अन्न प्राप्त करके उसे वेदों को जानने वाले ब्राह्मणों को प्रसन्नतापूर्वक दान करता है, वह अपने पापों के बंधन से मुक्त हो जाता है ॥22॥ | mahabharat अध्याय 13.117: पापसे छूटनेके उपाय तथा अन्नदानकी विशेष महिमा । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जो मनुष्य न्यायपूर्वक अन्न प्राप्त करके उसे वेदों को जानने वाले ब्राह्मणों को प्रसन्नतापूर्वक दान करता है, वह अपने पापों के बंधन से मुक्त हो जाता है ॥22॥
A man who acquires food in a just manner and gladly donates it to Brahmins who know the Vedas, becomes free from the bondage of his sins. ॥22॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥