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श्री महाभारत
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पर्व 13: अनुशासन पर्व
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अध्याय 116: बृहस्पतिका युधिष्ठिरसे प्राणियोंके जन्मके प्रकारका और नानाविध पापोंके फलस्वरूप नरकादिकी प्राप्ति एवं तिर्यग्योनियोंमें जन्म लेनेका वर्णन
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श्लोक 130
श्लोक
13.116.130
स्त्रियोऽप्येतेन कल्पेन कृत्वा पापमवाप्नुयु:।
एतेषामेव जन्तूनां भार्यात्वमुपयान्ति ता:॥ १३०॥
अनुवाद
यदि स्त्रियाँ भी पूर्वोक्त पाप करती हैं तो वे पाप की भागीदार बन जाती हैं और उन पापी लोगों की पत्नियाँ बन जाती हैं ॥130॥
If women too commit the aforesaid sins then they become partners in sin and they become the wives of those sinful people. ॥130॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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