Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.115.7: राजेंद्र! गर्दन को ज्येष्ठा नक्षत्र, कानों को श्रवण नक्षत्र, मुख को पुष्य नक्षत्र तथा दाँतों और होठों को स्वाति नक्षत्र से परिभाषित किया गया है।   |   mahabharat अध्याय 13.115: रूप-सौन्दर्य और लोकप्रियताकी प्राप्तिके लिये मार्गशीर्षमासमें चन्द्र-व्रत करनेका प्रतिपादन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 115: रूप-सौन्दर्य और लोकप्रियताकी प्राप्तिके लिये मार्गशीर्षमासमें चन्द्र-व्रत करनेका प्रतिपादन  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  13.115.7 
ग्रीवां ज्येष्ठा च राजेन्द्र श्रवणेन तु कर्णयो:।
मुखं पुष्येण दानेन दन्तोष्ठौ स्वातिरुच्यते॥ ७॥
 
 
अनुवाद
राजेंद्र! गर्दन को ज्येष्ठा नक्षत्र, कानों को श्रवण नक्षत्र, मुख को पुष्य नक्षत्र तथा दाँतों और होठों को स्वाति नक्षत्र से परिभाषित किया गया है।
 
Rajendra! The neck is defined by the Jyestha nakshatra, the ears by Shravan, the mouth by the Pushya nakshatra and the teeth and lips by the Swati nakshatra.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)