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mahabharat 13.115.6: राजन! दोनों भुजाओं में विशाखा, हाथों में हस्तक, अंगुलियों में पुनर्वसुका और नाखूनों में आश्लेषा को स्थापित करो।   |   mahabharat अध्याय 13.115: रूप-सौन्दर्य और लोकप्रियताकी प्राप्तिके लिये मार्गशीर्षमासमें चन्द्र-व्रत करनेका प्रतिपादन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.115.6 
बाहुभ्यां तु विशाखासु हस्तौ हस्तेन निर्दिशेत्।
पुनर्वस्वङ्गुली राजन्नाश्लेषासु नखास्तथा॥ ६॥
 
 
अनुवाद
राजन! दोनों भुजाओं में विशाखा, हाथों में हस्तक, अंगुलियों में पुनर्वसुका और नाखूनों में आश्लेषा को स्थापित करो।
 
King! Place Vishakha in both the arms, Hastaka in the hands, Punarvasuka in the fingers and Aashlesha in the nails.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)