श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 114: प्रत्येक मासकी द्वादशी तिथिको उपवास और भगवान‍् विष्णुकी पूजा करनेका विशेष माहात्म्य  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  13.114.5 
अहोरात्रेण द्वादश्यां माघमासे तु माधवम्।
राजसूयमवाप्नोति कुलं चैव समुद्धरेत्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
माघ मास की द्वादशी तिथि को दिन-रात उपवास करके भगवान माधव की पूजा करने से उपासक को राजसूय यज्ञ का फल प्राप्त होता है और उसके कुल का उद्धार होता है ॥5॥
 
By fasting day and night on the Dwadashi Tithi of the month of Magha and worshipping Lord Madhava, the worshipper obtains the fruits of the Rajasuya Yagna and liberates his family. ॥5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)