Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.113.5: जो ममता, अहंकार, राग-द्वेष, द्वन्द्व और आसक्ति से रहित हैं तथा भिक्षा द्वारा अपना जीवन निर्वाह करते हैं, वे शुद्ध अन्तःकरण वाले मुनिगण तीर्थस्वरूप हैं॥5॥ | mahabharat अध्याय 13.113: मानस तथा पार्थिव तीर्थकी महत्ता । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
निर्ममा निरहंकारा निर्द्वन्द्वा निष्परिग्रहा:।
शुचयस्तीर्थभूतास्ते ये भैक्ष्यमुपभुञ्जते॥ ५॥
अनुवाद
जो ममता, अहंकार, राग-द्वेष, द्वन्द्व और आसक्ति से रहित हैं तथा भिक्षा द्वारा अपना जीवन निर्वाह करते हैं, वे शुद्ध अन्तःकरण वाले मुनिगण तीर्थस्वरूप हैं॥5॥
Those who are free from affection, ego, love-hate conflict and attachment and live their lives by alms, those sages with pure conscience are the embodiment of pilgrimage. 5॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥