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mahabharat 13.113.4: कामनाओं और याचनाओं का अभाव, सरलता, सत्य, मृदुता, अहिंसा, सभी प्राणियों के प्रति क्रूरता का अभाव, दया, इन्द्रिय संयम और मन का संयम - ये पवित्रता के लक्षण हैं जो इस मानस तीर्थ में आने से प्राप्त होते हैं ॥4॥   |   mahabharat अध्याय 13.113: मानस तथा पार्थिव तीर्थकी महत्ता   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 113: मानस तथा पार्थिव तीर्थकी महत्ता  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  13.113.4 
तीर्थशौचमनर्थित्वमार्जवं सत्यमार्दवम्।
अहिंसा सर्वभूतानामानृशंस्यं दम: शम:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
कामनाओं और याचनाओं का अभाव, सरलता, सत्य, मृदुता, अहिंसा, सभी प्राणियों के प्रति क्रूरता का अभाव, दया, इन्द्रिय संयम और मन का संयम - ये पवित्रता के लक्षण हैं जो इस मानस तीर्थ में आने से प्राप्त होते हैं ॥4॥
 
Absence of desires and requests, simplicity, truth, softness, non-violence, absence of cruelty towards all living beings, kindness, control of senses and control of mind – these are the symptoms of purity achieved by attending this Manas Tirtha. 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)