Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.112.85-86h: बाघों और सिंहों द्वारा खींचा हुआ तथा मेघ के समान गर्जना करता हुआ एक दिव्य एवं उत्कृष्ट विमान उनके सामने प्रकट होता है, जिस पर वे बड़े आनन्द से सवार होते हैं। | mahabharat अध्याय 13.112: दरिद्रोंके लिये यज्ञतुल्य फल देनेवाले उपवास-व्रत और उसके फलका विस्तारपूर्वक वर्णन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
व्याघ्रसिंहप्रयुक्तं च मेघस्वननिनादितम्॥ ८५॥
विमानमुत्तमं दिव्यं सुसुखी ह्यधिरोहति।
अनुवाद
बाघों और सिंहों द्वारा खींचा हुआ तथा मेघ के समान गर्जना करता हुआ एक दिव्य एवं उत्कृष्ट विमान उनके सामने प्रकट होता है, जिस पर वे बड़े आनन्द से सवार होते हैं।
A divine and excellent aircraft drawn by tigers and lions and roaring like a cloud appears before him, on which he rides with great joy. 85 1/2
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥