श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 112: दरिद्रोंके लिये यज्ञतुल्य फल देनेवाले उपवास-व्रत और उसके फलका विस्तारपूर्वक वर्णन  »  श्लोक 71
 
 
श्लोक  13.112.71 
मणिमण्डलकैश्चित्रं जातरूपसमावृतम्।
दिव्याभरणशोभाभिर्वरस्त्रीभिरलंकृतम् ॥ ७१॥
 
 
अनुवाद
वह विमान स्वर्णपत्र से जड़ा हुआ है और रत्नों से बने अद्भुत गोलाकार चिह्नों से सुशोभित है। दिव्य वस्त्राभूषणों से सुसज्जित सुन्दर स्त्रियाँ उसे सुशोभित करती रहती हैं। 71॥
 
That plane is studded with gold leaf and is adorned with wonderful circular markings made of gems. Beautiful ladies adorned with divine clothes and ornaments keep adorning it. 71॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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