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श्लोक 13.112.68  |
देवकन्यानिवासे च तस्मिन् वसति मानव:।
जाह्नवीवालुकाकीर्णं पूर्णं संवत्सरं नर:॥ ६८॥ |
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| अनुवाद |
| वह मनुष्य उतने वर्षों तक देवकन्याओं के धाम में निवास करता है, जितने वर्षों तक गंगा में रेत के कण होते हैं। |
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| That human being resides in the abode of the celestial maidens for as many years as there are grains of sand in the Ganges. |
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