Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.112.64: वहाँ दिव्य कन्याएँ सदैव उनकी पूजा करती हैं और गान, वाद्यों की ध्वनि, शंख और पणव की मधुर ध्वनि से उन्हें प्रसन्न करती हैं ॥ 64॥ | mahabharat अध्याय 13.112: दरिद्रोंके लिये यज्ञतुल्य फल देनेवाले उपवास-व्रत और उसके फलका विस्तारपूर्वक वर्णन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
गीतगन्धर्वघोषैश्च भेरीपणवनि:स्वनै:।
सदा प्रह्लादितस्ताभिर्देवकन्याभिरिज्यते॥ ६४॥
अनुवाद
वहाँ दिव्य कन्याएँ सदैव उनकी पूजा करती हैं और गान, वाद्यों की ध्वनि, शंख और पणव की मधुर ध्वनि से उन्हें प्रसन्न करती हैं ॥ 64॥
There the celestial maidens worship him always, giving him pleasure with songs, the noise of musical instruments, and the sweet sound of the conch and the panava. ॥ 64॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥