Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.112.53-55h: वहाँ वह प्रलयकाल की अग्नि के समान तेजस्वी शरीर धारण करके असंख्य वर्षों तक, अर्थात् एक लाख एक हजार करोड़ वर्षों तक निवास करता है और प्रतिदिन देवताओं तथा दानवों द्वारा पूजित भगवान रुद्र को नमस्कार करता है। वे भगवान प्रतिदिन उसके समक्ष प्रकट होते रहते हैं। | mahabharat अध्याय 13.112: दरिद्रोंके लिये यज्ञतुल्य फल देनेवाले उपवास-व्रत और उसके फलका विस्तारपूर्वक वर्णन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वर्षाण्यपरिमेयानि युगान्ताग्निसमप्रभ:॥ ५३॥
कोटीशतसहस्रं च दशकोटिशतानि च।
रुद्रं नित्यं प्रणमते देवदानवसम्मतम्॥ ५४॥
स तस्मै दर्शनं प्राप्तो दिवसे दिवसे भवेत्।
अनुवाद
वहाँ वह प्रलयकाल की अग्नि के समान तेजस्वी शरीर धारण करके असंख्य वर्षों तक, अर्थात् एक लाख एक हजार करोड़ वर्षों तक निवास करता है और प्रतिदिन देवताओं तथा दानवों द्वारा पूजित भगवान रुद्र को नमस्कार करता है। वे भगवान प्रतिदिन उसके समक्ष प्रकट होते रहते हैं।
There he resides for innumerable years, one lakh one thousand crore years, assuming a body as radiant as the fire of doomsday, and daily pays obeisance to Lord Rudra, who is respected by the gods and demons. That Lord keeps appearing before him daily.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥