Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.112.49-51: जो मनुष्य बारह महीनों तक प्रतिदिन अग्निहोत्र करता है, ग्यारहवें दिन एक बार भोजन करता है, मन या वाणी में भी पराई स्त्री की इच्छा नहीं करता, तथा अपने माता-पिता के विषय में भी कभी झूठ नहीं बोलता, वह विमान में बैठकर सर्वशक्तिमान महादेव के पास जाता है और उसे एक हजार अश्वमेध यज्ञों का उत्तम फल प्राप्त होता है। | mahabharat अध्याय 13.112: दरिद्रोंके लिये यज्ञतुल्य फल देनेवाले उपवास-व्रत और उसके फलका विस्तारपूर्वक वर्णन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एकादशे तु दिवसे य: प्राप्ते प्राशते हवि:।
सदा द्वादशमासांस्तु जुह्वानो जातवेदसम्॥ ४९॥
परस्त्रियं नाभिलषेद् वाचाथ मनसापि वा।
अनृतं च न भाषेत मातापित्रो: कृतेपि वा॥ ५०॥
अभिगच्छेन्महादेवं विमानस्थं महाबलम्।
अश्वमेधसहस्रस्य फलं प्राप्नोत्यनुत्तमम्॥ ५१॥
अनुवाद
जो मनुष्य बारह महीनों तक प्रतिदिन अग्निहोत्र करता है, ग्यारहवें दिन एक बार भोजन करता है, मन या वाणी में भी पराई स्त्री की इच्छा नहीं करता, तथा अपने माता-पिता के विषय में भी कभी झूठ नहीं बोलता, वह विमान में बैठकर सर्वशक्तिमान महादेव के पास जाता है और उसे एक हजार अश्वमेध यज्ञों का उत्तम फल प्राप्त होता है।
He who performs Agnihotra every day for twelve months, and consumes food once every eleventh day, never desires another's wife even in thought or speech, and never tells a lie even about his parents, goes to the all-powerful Mahadeva seated in the plane and obtains the best result of a thousand Ashwamedha sacrifices.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥