श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 112: दरिद्रोंके लिये यज्ञतुल्य फल देनेवाले उपवास-व्रत और उसके फलका विस्तारपूर्वक वर्णन  »  श्लोक 38-39h
 
 
श्लोक  13.112.38-39h 
पद्मवर्णनिभं चैव विमानमधिरोहति।
कृष्णा: कनकगौर्यश्च नार्य: श्यामास्तथापरा:॥ ३८॥
वयोरूपविलासिन्यो लभते नात्र संशय:।
 
 
अनुवाद
वह कमल के रंग वाले विमान पर चढ़ता है और वहाँ उसे श्याम वर्ण, सुवर्ण वर्ण, सोलह वर्ष की आयु वाली, नवीन यौवन और मनोहर सौन्दर्य से विभूषित दिव्य अप्सराएँ मिलती हैं। इसमें कोई संदेह नहीं है। 38 1/2।
 
He boards a lotus-coloured plane and there he finds celestial nymphs with dark complexion, golden complexion, sixteen-year-old age and adorned with fresh youth and charming beauty. There is no doubt about this. 38 1/2.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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