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mahabharat 13.112.18-19h: उसे मयूर द्वारा खींचा हुआ विमान प्राप्त होता है और वह सप्तर्षियों के लोक में अप्सराओं के साथ सदैव निवास करता है। वह वहाँ तीन पद्म वर्ष तक रहता है।   |   mahabharat अध्याय 13.112: दरिद्रोंके लिये यज्ञतुल्य फल देनेवाले उपवास-व्रत और उसके फलका विस्तारपूर्वक वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.112.18-19h 
मयूरहंसयुक्तं च विमानं लभते नर:।
सप्तर्षीणां सदा लोके सोऽप्सरोभिर्वसेत् सह॥ १८॥
निवर्तनं च तत्रास्य त्रीणि पद्मानि चैव ह।
 
 
अनुवाद
उसे मयूर द्वारा खींचा हुआ विमान प्राप्त होता है और वह सप्तर्षियों के लोक में अप्सराओं के साथ सदैव निवास करता है। वह वहाँ तीन पद्म वर्ष तक रहता है।
 
He gets a plane drawn by peacocks and he always lives in the world of the Saptarishis with the Apsaras. He lives there for three Padma years. 18 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)