Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.112.143-144: भरत! जो लोग संयमी, सावधान, सदाचारी, महान बुद्धि वाले, अहंकार और छल से रहित, शुद्ध बुद्धि वाले और स्थिर स्वभाव वाले हैं, उनके लिए मैंने इस व्रत की विधि विस्तारपूर्वक बताई है। तुम्हें इस विषय में किसी प्रकार का संदेह नहीं करना चाहिए ॥143-144॥ | mahabharat अध्याय 13.112: दरिद्रोंके लिये यज्ञतुल्य फल देनेवाले उपवास-व्रत और उसके फलका विस्तारपूर्वक वर्णन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उपवासविधिस्त्वेष विस्तरेण प्रकीर्तित:।
नियतेष्वप्रमत्तेषु शौचवत्सु महात्मसु॥ १४३॥
दम्भद्रोहनिवृत्तेषु कृतबुद्धिषु भारत।
अचलेष्वप्रकम्पेषु मा ते भूदत्र संशय:॥ १४४॥
अनुवाद
भरत! जो लोग संयमी, सावधान, सदाचारी, महान बुद्धि वाले, अहंकार और छल से रहित, शुद्ध बुद्धि वाले और स्थिर स्वभाव वाले हैं, उनके लिए मैंने इस व्रत की विधि विस्तारपूर्वक बताई है। तुम्हें इस विषय में किसी प्रकार का संदेह नहीं करना चाहिए ॥143-144॥
Bharata! I have explained this method of fasting in detail for people who are disciplined, cautious, have good conduct, have great mind, are free from arrogance and deceit, have pure intellect, and have a steady and stable nature. You should not have any doubts in this matter. ॥143-144॥
इति श्रीमहाभारते अनुशासनपर्वणि दानधर्मपर्वणि उपवासविधिर्नाम सप्ताधिकशततमोऽध्याय:॥ १०७॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत अनुशासनपर्वके अन्तर्गत दानधर्मपर्वमें उपवासकी विधिनामक एक सौ सातवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १०७॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥