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mahabharat 13.112.139-140h: राजन! ऐसे गुणों से युक्त मनुष्य देवतुल्य शरीर सहित स्वर्गलोक में जाता है और वहाँ अपनी इच्छा के अनुसार पुण्य का फल भोगता है। ॥139 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 13.112: दरिद्रोंके लिये यज्ञतुल्य फल देनेवाले उपवास-व्रत और उसके फलका विस्तारपूर्वक वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.112.139-140h 
दिवं गत्वा शरीरेण स्वेन राजन् यथामर:॥ १३९॥
स्वर्गं पुण्यं यथाकाममुपभुङ्‍‍क्ते तथाविध:।
 
 
अनुवाद
राजन! ऐसे गुणों से युक्त मनुष्य देवतुल्य शरीर सहित स्वर्गलोक में जाता है और वहाँ अपनी इच्छा के अनुसार पुण्य का फल भोगता है। ॥139 1/2॥
 
King! A man endowed with such qualities goes to the heavenly world with his body like a god and enjoys the fruits of virtue there according to his desire. ॥ 139 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)