श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 112: दरिद्रोंके लिये यज्ञतुल्य फल देनेवाले उपवास-व्रत और उसके फलका विस्तारपूर्वक वर्णन  »  श्लोक 136-137h
 
 
श्लोक  13.112.136-137h 
मासोपवासी वर्षैस्तु दशभि: स्वर्गमुत्तमम्॥ १३६॥
महर्षित्वमथासाद्य सशरीरगतिर्भवेत्।
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य दस वर्षों तक प्रतिवर्ष एक मास उपवास करके तीसवें दिन भोजन करता है, वह परम स्वर्ग को प्राप्त होता है। महर्षि पद प्राप्त करके वह भौतिक शरीर से दिव्य लोक की यात्रा करता है। 136 1/2
 
A man who fasts for ten years for one month each year and eats on the thirtieth day goes to the highest heaven. After attaining the status of a Maharshi, he travels to the divine world in his physical body. 136 1/2
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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