Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.112.117-118: जो मनुष्य बारह महीनों तक अपने मन और इन्द्रियों को वश में रखता है और अट्ठाईसवें दिन केवल एक बार भोजन करता है, वह ऋषियों को मिलने वाले महान फल का भोग करता है ॥117-118॥ | mahabharat अध्याय 13.112: दरिद्रोंके लिये यज्ञतुल्य फल देनेवाले उपवास-व्रत और उसके फलका विस्तारपूर्वक वर्णन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जो मनुष्य बारह महीनों तक अपने मन और इन्द्रियों को वश में रखता है और अट्ठाईसवें दिन केवल एक बार भोजन करता है, वह ऋषियों को मिलने वाले महान फल का भोग करता है ॥117-118॥
He who controls his mind and senses for twelve months and eats only once on the twenty-eighth day, enjoys the great fruit obtained by the sages. ॥ 117-118॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥