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mahabharat 13.111.70: पूर्वकाल में अंगिरा ऋषि ने महर्षियों को इस व्रत का माहात्म्य बताया था। जो मनुष्य सदैव लोगों को इसका उपदेश करता है, वह कभी दुःखी नहीं होता।   |   mahabharat अध्याय 13.111: मास, पक्ष एवं तिथिसम्बन्धी विभिन्न व्रतोपवासके फलका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 111: मास, पक्ष एवं तिथिसम्बन्धी विभिन्न व्रतोपवासके फलका वर्णन  »  श्लोक 70
 
 
श्लोक  13.111.70 
इदमङ्गिरसा पूर्वं महर्षिभ्य: प्रदर्शितम्।
य: प्रदर्शयते नित्यं न स दु:खमवाप्नुते॥ ७०॥
 
 
अनुवाद
पूर्वकाल में अंगिरा ऋषि ने महर्षियों को इस व्रत का माहात्म्य बताया था। जो मनुष्य सदैव लोगों को इसका उपदेश करता है, वह कभी दुःखी नहीं होता।
 
In the past, sage Angira had shown the greatness of this fast to the great sages. He who always preaches this to the people, never becomes sad.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)