Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.111.54-55h: हे प्रभु! ऐसा पुरुष हंसों द्वारा खींचे जाने वाले दिव्य विमान में बैठकर एक लाख वर्षों तक स्वर्ग का आनंद लेता है। सैकड़ों कुमारियाँ उस पुरुष का सत्कार करती हैं ॥54 1/2॥ | mahabharat अध्याय 13.111: मास, पक्ष एवं तिथिसम्बन्धी विभिन्न व्रतोपवासके फलका वर्णन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
दिवं हंसप्रयुक्तेन विमानेन स गच्छति।
शतं वर्षसहस्राणां मोदते स दिवि प्रभो॥ ५४॥
शतं चाप्सरस: कन्या रमयन्त्यपि तं नरम्।
अनुवाद
हे प्रभु! ऐसा पुरुष हंसों द्वारा खींचे जाने वाले दिव्य विमान में बैठकर एक लाख वर्षों तक स्वर्ग का आनंद लेता है। सैकड़ों कुमारियाँ उस पुरुष का सत्कार करती हैं ॥54 1/2॥
O Lord! Such a man travels in a divine plane drawn by swans and enjoys the heavenly abode for one lakh years. Hundreds of virgin nymphs entertain that man. ॥ 54 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥