श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 111: मास, पक्ष एवं तिथिसम्बन्धी विभिन्न व्रतोपवासके फलका वर्णन  »  श्लोक 53
 
 
श्लोक  13.111.53 
अनार्तो व्याधिरहितो गच्छेदनशनं तु य:।
पदे पदे यज्ञफलं स प्राप्नोति न संशय:॥ ५३॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य बिना किसी रोग के व्रत करता है, उसे पग-पग पर यज्ञ का फल मिलता है, इसमें कोई संदेह नहीं है ॥53॥
 
He who observes fast without any illness gets the fruits of sacrifice at every step, there is no doubt about it. ॥ 53॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)