Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.111.5: हे भरतश्रेष्ठ! मनुष्य किस कर्म से पापों से मुक्त होता है और किस कर्म से धर्म को प्राप्त करता है? उसे पुण्य और स्वर्ग की प्राप्ति किस प्रकार होती है?   |   mahabharat अध्याय 13.111: मास, पक्ष एवं तिथिसम्बन्धी विभिन्न व्रतोपवासके फलका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 111: मास, पक्ष एवं तिथिसम्बन्धी विभिन्न व्रतोपवासके फलका वर्णन  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  13.111.5 
अधर्मान्मुच्यते केन धर्ममाप्नोति वा कथम्।
स्वर्गं पुण्यं च लभते कथं भरतसत्तम॥ ५॥
 
 
अनुवाद
हे भरतश्रेष्ठ! मनुष्य किस कर्म से पापों से मुक्त होता है और किस कर्म से धर्म को प्राप्त करता है? उसे पुण्य और स्वर्ग की प्राप्ति किस प्रकार होती है?
 
O best of the Bharatas! By what action does a man get rid of his sins and by what action does he attain Dharma? How does he attain virtue and heaven?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)