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mahabharat 13.111.45-46h: हे मनुष्यों के स्वामी! जो मनुष्य चार दिन में एक बार भोजन करके एक वर्ष तक जीवित रहता है, उसे गौओं पर किए गए यज्ञ का फल मिलता है।   |   mahabharat अध्याय 13.111: मास, पक्ष एवं तिथिसम्बन्धी विभिन्न व्रतोपवासके फलका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 111: मास, पक्ष एवं तिथिसम्बन्धी विभिन्न व्रतोपवासके फलका वर्णन  »  श्लोक 45-46h
 
 
श्लोक  13.111.45-46h 
अष्टमेन तु भक्तेन जीवन् संवत्सरं नृप॥ ४५॥
गवामयस्य यज्ञस्य फलं प्राप्नोति मानव:।
 
 
अनुवाद
हे मनुष्यों के स्वामी! जो मनुष्य चार दिन में एक बार भोजन करके एक वर्ष तक जीवित रहता है, उसे गौओं पर किए गए यज्ञ का फल मिलता है।
 
O Lord of men! A man who lives for a year by eating every four days gets the fruits of a sacrifice made on cows. 45 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)