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mahabharat 13.111.4: हे पुरुषश्रेष्ठ! कहा गया है कि उपवास महान पुण्य है और उपवास ही सबसे बड़ा आश्रय है; परंतु यहाँ उपवास करने से मनुष्य को क्या लाभ होता है?॥4॥   |   mahabharat अध्याय 13.111: मास, पक्ष एवं तिथिसम्बन्धी विभिन्न व्रतोपवासके फलका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 111: मास, पक्ष एवं तिथिसम्बन्धी विभिन्न व्रतोपवासके फलका वर्णन  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  13.111.4 
उपवास: परं पुण्यमुपवास: परायणम्।
उपोष्येह नरश्रेष्ठ किं फलं प्रतिपद्यते॥ ४॥
 
 
अनुवाद
हे पुरुषश्रेष्ठ! कहा गया है कि उपवास महान पुण्य है और उपवास ही सबसे बड़ा आश्रय है; परंतु यहाँ उपवास करने से मनुष्य को क्या लाभ होता है?॥4॥
 
O best of men! It is said that fasting is a great virtue and fasting is the greatest refuge; but what benefit does a man get by fasting here?॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)