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श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 111: मास, पक्ष एवं तिथिसम्बन्धी विभिन्न व्रतोपवासके फलका वर्णन  »  श्लोक 39-40h
 
 
श्लोक  13.111.39-40h 
यस्तु संवत्सरं पूर्णमेकाहारो भवेन्नर:॥ ३९॥
अतिरात्रस्य यज्ञस्य स फलं समुपाश्नुते।
 
 
अनुवाद
जो व्यक्ति दिन में केवल एक बार भोजन करके वर्ष भर जीवित रहता है, वह अतिरात्र यज्ञ का फल भोगता है।
 
A person who lives for a whole year by eating only once a day, enjoys the fruits of performing Atiratra Yajna. 39 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)