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mahabharat 13.111.31: पुरुषसिंह! इस प्रकार मैंने एक मास तक एक बार उपवास करने वाले मनुष्यों के लिए भिन्न-भिन्न मासों का फल बताया है। पृथ्वीनाथ! अब तिथियों का भी विधान सुनो। 31।   |   mahabharat अध्याय 13.111: मास, पक्ष एवं तिथिसम्बन्धी विभिन्न व्रतोपवासके फलका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 111: मास, पक्ष एवं तिथिसम्बन्धी विभिन्न व्रतोपवासके फलका वर्णन  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  13.111.31 
इति मासा नरव्याघ्र क्षिपतां परिकीर्तिता:।
तिथीनां नियमा ये तु शृणु तानपि पार्थिव॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
पुरुषसिंह! इस प्रकार मैंने एक मास तक एक बार उपवास करने वाले मनुष्यों के लिए भिन्न-भिन्न मासों का फल बताया है। पृथ्वीनाथ! अब तिथियों का भी विधान सुनो। 31।
 
Purushsingh! In this way I have told the results of different months for those people who observe one meal fast for a month. Prithvinath! Now listen to the rules of the dates also. 31.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)