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mahabharat 13.111.23: जो मनुष्य नियमपूर्वक जीवन व्यतीत करता है और चैत्र मास में केवल एक बार भोजन करता है, वह स्वर्ण, रत्न और मोतियों से परिपूर्ण महान कुल में जन्म लेता है।   |   mahabharat अध्याय 13.111: मास, पक्ष एवं तिथिसम्बन्धी विभिन्न व्रतोपवासके फलका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 111: मास, पक्ष एवं तिथिसम्बन्धी विभिन्न व्रतोपवासके फलका वर्णन  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  13.111.23 
चैत्रं तु नियतो मासमेकभक्तेन य: क्षिपेत्।
सुवर्णमणिमुक्ताढ्ये कुले महति जायते॥ २३॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य नियमपूर्वक जीवन व्यतीत करता है और चैत्र मास में केवल एक बार भोजन करता है, वह स्वर्ण, रत्न और मोतियों से परिपूर्ण महान कुल में जन्म लेता है।
 
He who lives according to the rules and spends the month of Chaitra eating only once a day takes birth in a great family filled with gold, precious stones and pearls. 23.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)