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mahabharat 13.11.d1: मैं उन लोगों में निवास करता हूँ जो अपना समय कभी नष्ट नहीं करते, जो दान देने और स्वच्छता बनाए रखने में सदैव तत्पर रहते हैं, जो ब्रह्मचर्य, तप, ज्ञान, गाय और ब्राह्मणों से प्रेम करते हैं।   |   mahabharat अध्याय 13.11: लक्ष्मीके निवास करने और न करने योग्य पुरुष, स्त्री और स्थानोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 11: लक्ष्मीके निवास करने और न करने योग्य पुरुष, स्त्री और स्थानोंका वर्णन  »  श्लोक d1
 
 
श्लोक  13.11.d1 
(अबन्ध्यकालेषु सदा दानशौचरतेषु च।
ब्रह्मचर्यतपोज्ञानगोद्विजातिप्रियेषु च॥
 
 
अनुवाद
मैं उन लोगों में निवास करता हूँ जो अपना समय कभी नष्ट नहीं करते, जो दान देने और स्वच्छता बनाए रखने में सदैव तत्पर रहते हैं, जो ब्रह्मचर्य, तप, ज्ञान, गाय और ब्राह्मणों से प्रेम करते हैं।
 
I reside in those who never waste their time, who are always ready to give charity and maintain cleanliness, who love celibacy, austerity, knowledge, cows and the Brahmins.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)