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mahabharat 13.11.7: मैं उस मनुष्य में निवास नहीं करता जो आलसी, नास्तिक, वर्णसंकर, कृतघ्न, दुष्ट, क्रूर, चोर और गुरुजनों में दोष देखने वाला है ॥7॥   |   mahabharat अध्याय 13.11: लक्ष्मीके निवास करने और न करने योग्य पुरुष, स्त्री और स्थानोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 11: लक्ष्मीके निवास करने और न करने योग्य पुरुष, स्त्री और स्थानोंका वर्णन  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  13.11.7 
नाकर्मशीले पुरुषे वसामि
न नास्तिके साङ्करिके कृतघ्ने।
न भिन्नवृत्ते न नृशंसवर्णे
न चापि चौरे न गुरुष्वसूये॥ ७॥
 
 
अनुवाद
मैं उस मनुष्य में निवास नहीं करता जो आलसी, नास्तिक, वर्णसंकर, कृतघ्न, दुष्ट, क्रूर, चोर और गुरुजनों में दोष देखने वाला है ॥7॥
 
I do not reside in a person who is lazy, an atheist, of a mixed caste, ungrateful, wicked, cruel, a thief and one who finds faults in the teachers. ॥ 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)