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mahabharat 13.11.5: रुक्मिणी के इस प्रकार पूछने पर चन्द्रमुखी लक्ष्मीदेवी प्रसन्न हो गईं और भगवान गरुड़ध्वज के समक्ष मधुर वाणी में ये वचन कहने लगीं॥5॥   |   mahabharat अध्याय 13.11: लक्ष्मीके निवास करने और न करने योग्य पुरुष, स्त्री और स्थानोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 11: लक्ष्मीके निवास करने और न करने योग्य पुरुष, स्त्री और स्थानोंका वर्णन  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  13.11.5 
एवं तदा श्रीरभिभाष्यमाणा
देव्या समक्षं गरुडध्वजस्य।
उवाच वाक्यं मधुराभिधानं
मनोहरं चन्द्रमुखी प्रसन्ना॥ ५॥
 
 
अनुवाद
रुक्मिणी के इस प्रकार पूछने पर चन्द्रमुखी लक्ष्मीदेवी प्रसन्न हो गईं और भगवान गरुड़ध्वज के समक्ष मधुर वाणी में ये वचन कहने लगीं॥5॥
 
On Rukmini asking like this, Chandramukhi Lakshmidevi became pleased and said these words in a sweet voice in front of Lord Garudadhwaj. 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)