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mahabharat 13.11.12-13h: जो स्त्री पाप कर्मों में निर्दयतापूर्वक प्रवृत्त रहती है, अशुद्ध, लोभी, अधीर, कलहप्रिय तथा सदा सोते समय बिस्तर पर अचेत पड़ी रहती है, उससे मैं सदैव दूर रहता हूँ। ॥12 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 13.11: लक्ष्मीके निवास करने और न करने योग्य पुरुष, स्त्री और स्थानोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 11: लक्ष्मीके निवास करने और न करने योग्य पुरुष, स्त्री और स्थानोंका वर्णन  »  श्लोक 12-13h
 
 
श्लोक  13.11.12-13h 
पापामचोक्षामवलेहिनीं च
व्यपेतधैर्यां कलहप्रियां च॥ १२॥
निद्राभिभूतां सततं शयाना-
मेवंविधां तां परिवर्जयामि।
 
 
अनुवाद
जो स्त्री पाप कर्मों में निर्दयतापूर्वक प्रवृत्त रहती है, अशुद्ध, लोभी, अधीर, कलहप्रिय तथा सदा सोते समय बिस्तर पर अचेत पड़ी रहती है, उससे मैं सदैव दूर रहता हूँ। ॥12 1/2॥
 
I always stay away from a woman who is ruthlessly inclined towards sinful acts, is impure, greedy, impatient, fond of quarrels and who always lies on the bed unconscious in her sleep. ॥ 12 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)