प्रकीर्णभाण्डामनवेक्ष्यकारिणीं
सदा च भर्तु: प्रतिकूलवादिनीम्॥ ११॥
परस्य वेश्माभिरतामलज्जा-
मेवंविधां तां परिवर्जयामि।
अनुवाद
मैं उन लोगों को त्याग देता हूँ जो घर के बर्तनों को व्यवस्थित ढंग से नहीं रखते, बल्कि उन्हें इधर-उधर बिखेर कर रखते हैं, जो सोच-समझकर काम नहीं करते, जो हमेशा अपने पति के विरुद्ध बोलते रहते हैं, जो दूसरों के घर जाने के शौकीन हैं और जिन्होंने शील का पूर्णतः त्याग कर दिया है।
I abandon those who do not keep the household utensils in an orderly manner and instead keep them scattered here and there, who do not work thoughtfully, who always speak against their husbands, who are fond of visiting other people's houses and who have completely given up all sense of modesty.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥