श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 109: आयुकी वृद्धि और क्षय करनेवाले शुभाशुभ कर्मोंके वर्णनसे गृहस्थाश्रमके कर्तव्योंका विस्तारपूर्वक निरूपण  »  श्लोक d11
 
 
श्लोक  13.109.d11 
(मान्यानां माननं कुर्यान्निन्द्यानां निन्दनं तथा।
गोब्राह्मणार्थे युध्येत प्राणानपि परित्यजेत्॥ )
 
 
अनुवाद
राजा को चाहिए कि वह प्रतिष्ठित लोगों का आदर करे और अपमानित लोगों की निंदा करे। उसे गायों और ब्राह्मणों के लिए युद्ध करना चाहिए। यदि आवश्यक हो, तो उनकी रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति भी देनी चाहिए।
 
The king should respect honourable people and criticise dishonourable people. He should fight for cows and Brahmins. If necessary, he should even sacrifice his life to protect them.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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