श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 109: आयुकी वृद्धि और क्षय करनेवाले शुभाशुभ कर्मोंके वर्णनसे गृहस्थाश्रमके कर्तव्योंका विस्तारपूर्वक निरूपण  »  श्लोक d1-d2h
 
 
श्लोक  13.109.d1-d2h 
(अमावास्यामृते नित्यं दंतधावनमाचरेत्।
इतिहासपुराणानि दानं वेदं च नित्यश:॥
गायत्रीमननं नित्यं कुर्यात् संध्यां समाहित:।)
 
 
अनुवाद
अमावस्या को छोड़कर प्रतिदिन दंतमंजन करना चाहिए। इतिहास, पुराण पठन, वेदों का स्वाध्याय, दान, एकाग्रतापूर्वक संध्यावंदन तथा गायत्री मंत्र का जप - ये सभी कर्म प्रतिदिन करने चाहिए।
 
Tooth brushing should be done every day except on Amavasya. History, reading of Puranas, self-study of Vedas, charity, evening prayer with concentration and chanting of Gayatri Mantra – all these deeds should be done daily.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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