श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 109: आयुकी वृद्धि और क्षय करनेवाले शुभाशुभ कर्मोंके वर्णनसे गृहस्थाश्रमके कर्तव्योंका विस्तारपूर्वक निरूपण  »  श्लोक 94
 
 
श्लोक  13.109.94 
सायंप्रातश्च भुञ्जीत नान्तराले समाहित:।
वालेन तु न भुञ्जीत परश्राद्धं तथैव च॥ ९४॥
 
 
अनुवाद
प्रतिदिन प्रातः और सायं एकाग्रचित्त होकर भोजन करो। बीच में कुछ भी खाना उचित नहीं है। जिस भोजन में बाल गिरे हों, उसे मत खाओ और शत्रु के श्राद्ध में भी कभी भोजन मत करो। ॥94॥
 
Eat with concentration every day in the morning and evening. It is not appropriate to eat anything in between. Do not eat food in which hair has fallen and never eat food during the shraddha of an enemy. ॥94॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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