Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.109.93: विद्वान पुरुष को चाहिए कि वह अपने हाथ का नमक न चाटे। रात्रि में दही और सत्तू न खाए। मांस अभक्ष्य है, उसका सर्वथा त्याग कर दे। 93॥   |   mahabharat अध्याय 13.109: आयुकी वृद्धि और क्षय करनेवाले शुभाशुभ कर्मोंके वर्णनसे गृहस्थाश्रमके कर्तव्योंका विस्तारपूर्वक निरूपण   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 109: आयुकी वृद्धि और क्षय करनेवाले शुभाशुभ कर्मोंके वर्णनसे गृहस्थाश्रमके कर्तव्योंका विस्तारपूर्वक निरूपण  »  श्लोक 93
 
 
श्लोक  13.109.93 
न पाणौ लवणं विद्वान् प्राश्नीयान्न च रात्रिषु।
दधिसक्तून् न भुञ्जीत वृथा मांसं च वर्जयेत्॥ ९३॥
 
 
अनुवाद
विद्वान पुरुष को चाहिए कि वह अपने हाथ का नमक न चाटे। रात्रि में दही और सत्तू न खाए। मांस अभक्ष्य है, उसका सर्वथा त्याग कर दे। 93॥
 
A learned man should not lick salt in his hand. Do not eat curd and sattu at night. Meat is an inedible thing, give it up completely. 93॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)