Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.109.91: बुद्धिमान पुरुष को चाहिए कि वह अशुद्ध व्यक्ति के पास बैठकर या सज्जनों के सामने बैठकर भोजन न करे। धर्मशास्त्रों में निषिद्ध भोजन को पीठ के पीछे छिपाकर भी न खाए॥ 91॥   |   mahabharat अध्याय 13.109: आयुकी वृद्धि और क्षय करनेवाले शुभाशुभ कर्मोंके वर्णनसे गृहस्थाश्रमके कर्तव्योंका विस्तारपूर्वक निरूपण   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 109: आयुकी वृद्धि और क्षय करनेवाले शुभाशुभ कर्मोंके वर्णनसे गृहस्थाश्रमके कर्तव्योंका विस्तारपूर्वक निरूपण  »  श्लोक 91
 
 
श्लोक  13.109.91 
न संनिकृष्टे मेधावी नाशुचेर्न च सत्सु च।
प्रतिषिद्धान्नधर्मेषु भक्ष्यान् भुञ्जीत पृष्ठत:॥ ९१॥
 
 
अनुवाद
बुद्धिमान पुरुष को चाहिए कि वह अशुद्ध व्यक्ति के पास बैठकर या सज्जनों के सामने बैठकर भोजन न करे। धर्मशास्त्रों में निषिद्ध भोजन को पीठ के पीछे छिपाकर भी न खाए॥ 91॥
 
A wise man should not eat food while sitting near an impure person or in front of good men. He should not eat food that has been prohibited in religious texts, even by hiding it behind one's back.॥ 91॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)