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mahabharat 13.109.85: प्रजानाथ! स्नान के पश्चात् मनुष्य को अपने माथे पर गीला चंदन लगाना चाहिए। बुद्धिमान पुरुष को कभी वस्त्र नहीं बदलना चाहिए, अर्थात् अधोवस्त्र के स्थान पर उत्तरीय वस्त्र और उत्तरीय वस्त्र के स्थान पर अधोवस्त्र नहीं पहनना चाहिए। 85॥   |   mahabharat अध्याय 13.109: आयुकी वृद्धि और क्षय करनेवाले शुभाशुभ कर्मोंके वर्णनसे गृहस्थाश्रमके कर्तव्योंका विस्तारपूर्वक निरूपण   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 109: आयुकी वृद्धि और क्षय करनेवाले शुभाशुभ कर्मोंके वर्णनसे गृहस्थाश्रमके कर्तव्योंका विस्तारपूर्वक निरूपण  »  श्लोक 85
 
 
श्लोक  13.109.85 
स्नातस्य वर्णकं नित्यमार्द्रं दद्याद् विशाम्पते।
विपर्ययं न कुर्वीत वाससो बुद्धिमान् नर:॥ ८५॥
 
 
अनुवाद
प्रजानाथ! स्नान के पश्चात् मनुष्य को अपने माथे पर गीला चंदन लगाना चाहिए। बुद्धिमान पुरुष को कभी वस्त्र नहीं बदलना चाहिए, अर्थात् अधोवस्त्र के स्थान पर उत्तरीय वस्त्र और उत्तरीय वस्त्र के स्थान पर अधोवस्त्र नहीं पहनना चाहिए। 85॥
 
Prajanath! After bathing, a person should apply wet sandalwood on his forehead. An intelligent man should never change his clothes, that is, he should not wear the northern clothes in place of the undergarments and the undergarments in place of the northern clothes. 85॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)