श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 109: आयुकी वृद्धि और क्षय करनेवाले शुभाशुभ कर्मोंके वर्णनसे गृहस्थाश्रमके कर्तव्योंका विस्तारपूर्वक निरूपण  »  श्लोक 84
 
 
श्लोक  13.109.84 
रक्तं शिरसि धार्यं तु तथा वानेयमित्यपि।
कांचनीयापि माला या न सा दुष्यति कर्हिचित्॥ ८४॥
 
 
अनुवाद
सिर पर लाल और जंगली फूल धारण करने चाहिए। सोने की माला पहनने से कभी अशुद्धि नहीं होती। 84.
 
Red flowers and wild flowers should be worn on the head. Wearing a gold garland never makes one impure. 84.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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