Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.109.83: प्रभु! विद्वान पुरुष को श्वेत पुष्पों की माला धारण करनी चाहिए, लाल पुष्पों की नहीं; तथापि यह नियम तभी लागू होता है जब कमल और पुष्प-अंगुली को छोड़ दिया जाए। अर्थात् कमल और पुष्प-अंगुली लाल होने पर भी उन्हें धारण करने में कोई हानि नहीं है ॥ 83॥ | mahabharat अध्याय 13.109: आयुकी वृद्धि और क्षय करनेवाले शुभाशुभ कर्मोंके वर्णनसे गृहस्थाश्रमके कर्तव्योंका विस्तारपूर्वक निरूपण । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
रक्तमाल्यं न धार्यं स्याच्छुक्लं धार्यं तु पण्डितै:।
वर्जयित्वा तु कमलं तथा कुवलयं प्रभो॥ ८३॥
अनुवाद
प्रभु! विद्वान पुरुष को श्वेत पुष्पों की माला धारण करनी चाहिए, लाल पुष्पों की नहीं; तथापि यह नियम तभी लागू होता है जब कमल और पुष्प-अंगुली को छोड़ दिया जाए। अर्थात् कमल और पुष्प-अंगुली लाल होने पर भी उन्हें धारण करने में कोई हानि नहीं है ॥ 83॥
Prabhu! A learned man should wear a garland of white flowers, not red flowers; however, this rule applies only when the lotus and the flower-ring are left out. That is, even if the lotus and the flower-ring are red, there is no harm in wearing them. ॥ 83॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥