श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 109: आयुकी वृद्धि और क्षय करनेवाले शुभाशुभ कर्मोंके वर्णनसे गृहस्थाश्रमके कर्तव्योंका विस्तारपूर्वक निरूपण  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  13.109.8 
तस्मात् कुर्यादिहाचारं यदीच्छेद् भूतिमात्मन:।
अपि पापशरीरस्य आचारो हन्त्यलक्षणम्॥ ८॥
 
 
अनुवाद
अतः यदि मनुष्य अपना कल्याण करना चाहता है, तो उसे इस संसार में सदाचार का पालन करना ही होगा। पापों से भरा हुआ सम्पूर्ण शरीर भी यदि सदाचार का पालन करे, तो वह अपने शरीर और मन के दुर्गुणों का दमन कर सकता है। ॥8॥
 
Therefore, if a man wants to do good to himself, he must follow good conduct in this world. Even if a person whose entire body is full of sins follows good conduct, then he can suppress the evil traits of his body and mind. ॥ 8॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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