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mahabharat 13.109.76: दिन में उत्तर दिशा की ओर तथा रात्रि में दक्षिण दिशा की ओर मुख करके मल-मूत्र त्याग करें। ऐसा करने से आयु नष्ट नहीं होती ॥76॥   |   mahabharat अध्याय 13.109: आयुकी वृद्धि और क्षय करनेवाले शुभाशुभ कर्मोंके वर्णनसे गृहस्थाश्रमके कर्तव्योंका विस्तारपूर्वक निरूपण   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 109: आयुकी वृद्धि और क्षय करनेवाले शुभाशुभ कर्मोंके वर्णनसे गृहस्थाश्रमके कर्तव्योंका विस्तारपूर्वक निरूपण  »  श्लोक 76
 
 
श्लोक  13.109.76 
उभे मूत्रपुरीषे तु दिवा कुर्यादुदङ्मुख:।
दक्षिणाभिमुखो रात्रौ तथा ह्यायुर्न रिष्यते॥ ७६॥
 
 
अनुवाद
दिन में उत्तर दिशा की ओर तथा रात्रि में दक्षिण दिशा की ओर मुख करके मल-मूत्र त्याग करें। ऐसा करने से आयु नष्ट नहीं होती ॥76॥
 
Excrete both stool and urine while facing north during the day and facing south at night. By doing this the age is not destroyed. 76॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)