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पर्व 13: अनुशासन पर्व
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अध्याय 109: आयुकी वृद्धि और क्षय करनेवाले शुभाशुभ कर्मोंके वर्णनसे गृहस्थाश्रमके कर्तव्योंका विस्तारपूर्वक निरूपण
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श्लोक 75
श्लोक
13.109.75
प्रत्यादित्यं प्रत्यनलं प्रति गां च प्रति द्विजान्।
ये मेहन्ति च पन्थानं ते भवन्ति गतायुष:॥ ७५॥
अनुवाद
जो लोग सूर्य, अग्नि, गाय और ब्राह्मणों की ओर मुख करके मूत्र त्याग करते हैं तथा जो लोग मार्ग के बीच में मूत्र त्याग करते हैं, वे सभी दीर्घायु होते हैं।
Those who urinate facing the Sun, Fire, Cow and Brahmins, and those who urinate in the middle of the road, all of them live long. 7 5.
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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