Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.109.71: झूठी शिक्षा न दे और बुरी अवस्था में भी कभी स्वाध्याय न करे। यदि दुर्गन्धयुक्त वायु बह रही हो, तो स्वाध्याय का विचार भी न करे। 71॥   |   mahabharat अध्याय 13.109: आयुकी वृद्धि और क्षय करनेवाले शुभाशुभ कर्मोंके वर्णनसे गृहस्थाश्रमके कर्तव्योंका विस्तारपूर्वक निरूपण   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 109: आयुकी वृद्धि और क्षय करनेवाले शुभाशुभ कर्मोंके वर्णनसे गृहस्थाश्रमके कर्तव्योंका विस्तारपूर्वक निरूपण  »  श्लोक 71
 
 
श्लोक  13.109.71 
नाध्यापयेत् तथोच्छिष्टो नाधीयीत कदाचन।
वाते च पूतिगन्धे च मनसापि न चिन्तयेत्॥ ७१॥
 
 
अनुवाद
झूठी शिक्षा न दे और बुरी अवस्था में भी कभी स्वाध्याय न करे। यदि दुर्गन्धयुक्त वायु बह रही हो, तो स्वाध्याय का विचार भी न करे। 71॥
 
Don't give false teachings and never do self-study even when you are in a bad state. If foul smelling air blows, then one should not even think about self-study. 71॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)