Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.109.7: दुष्ट मनुष्य, जिससे सभी प्राणी डरते हैं और जिसका तिरस्कार करते हैं, इस संसार में दीर्घायु प्राप्त नहीं करता।   |   mahabharat अध्याय 13.109: आयुकी वृद्धि और क्षय करनेवाले शुभाशुभ कर्मोंके वर्णनसे गृहस्थाश्रमके कर्तव्योंका विस्तारपूर्वक निरूपण   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 109: आयुकी वृद्धि और क्षय करनेवाले शुभाशुभ कर्मोंके वर्णनसे गृहस्थाश्रमके कर्तव्योंका विस्तारपूर्वक निरूपण  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  13.109.7 
दुराचारो हि पुरुषो नेहायुर्विन्दते महत्।
त्रसन्ति यस्माद् भूतानि तथा परिभवन्ति च॥ ७॥
 
 
अनुवाद
दुष्ट मनुष्य, जिससे सभी प्राणी डरते हैं और जिसका तिरस्कार करते हैं, इस संसार में दीर्घायु प्राप्त नहीं करता।
 
The wicked man, who is feared and despised by all creatures, does not achieve long life in this world.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)