Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.109.62-63h: जो व्यक्ति गीले पैर से भोजन करता है, वह सौ वर्ष तक जीवित रहता है। भोजन के बाद हाथ-मुँह धोए बिना मनुष्य अशुद्ध रहता है। ऐसी स्थिति में उसे अग्नि, गौ और ब्राह्मण - इन तीनों का स्पर्श नहीं करना चाहिए। ऐसा आचरण करने से जीवन नष्ट नहीं होता। 62 1/2॥ | mahabharat अध्याय 13.109: आयुकी वृद्धि और क्षय करनेवाले शुभाशुभ कर्मोंके वर्णनसे गृहस्थाश्रमके कर्तव्योंका विस्तारपूर्वक निरूपण । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
आर्द्रपादस्तु भुंजानो वर्षाणां जीवते शतम्।
त्रीणि तेजांसि नोच्छिष्ट आलभेत कदाचन॥ ६२॥
अग्निं गां ब्राह्मणं चैव तथा ह्यायुर्न रिष्यते।
अनुवाद
जो व्यक्ति गीले पैर से भोजन करता है, वह सौ वर्ष तक जीवित रहता है। भोजन के बाद हाथ-मुँह धोए बिना मनुष्य अशुद्ध रहता है। ऐसी स्थिति में उसे अग्नि, गौ और ब्राह्मण - इन तीनों का स्पर्श नहीं करना चाहिए। ऐसा आचरण करने से जीवन नष्ट नहीं होता। 62 1/2॥
A person who eats food with wet feet lives for a hundred years. Without washing hands and face after eating, a person remains impure. In such a situation he should not touch the three luminaries – fire, cow and Brahmin. By behaving like this, life will not be destroyed. 62 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥