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mahabharat 13.109.61: खड़े होकर पेशाब न करें। राख में या गौशाला में पेशाब न करें। गीले पैर से भोजन करें, पर सोएँ नहीं। ॥61॥   |   mahabharat अध्याय 13.109: आयुकी वृद्धि और क्षय करनेवाले शुभाशुभ कर्मोंके वर्णनसे गृहस्थाश्रमके कर्तव्योंका विस्तारपूर्वक निरूपण   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 109: आयुकी वृद्धि और क्षय करनेवाले शुभाशुभ कर्मोंके वर्णनसे गृहस्थाश्रमके कर्तव्योंका विस्तारपूर्वक निरूपण  »  श्लोक 61
 
 
श्लोक  13.109.61 
मूत्रं नोत्तिष्ठता कार्यं न भस्मनि न गोव्रजे।
आर्द्रपादस्तु भुंजीत नार्द्रपादस्तु संविशेत्॥ ६१॥
 
 
अनुवाद
खड़े होकर पेशाब न करें। राख में या गौशाला में पेशाब न करें। गीले पैर से भोजन करें, पर सोएँ नहीं। ॥61॥
 
Do not urinate while standing. Do not urinate in ashes or in a cowshed. Eat with wet feet but do not sleep. ॥ 61॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)