श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 109: आयुकी वृद्धि और क्षय करनेवाले शुभाशुभ कर्मोंके वर्णनसे गृहस्थाश्रमके कर्तव्योंका विस्तारपूर्वक निरूपण  »  श्लोक 57
 
 
श्लोक  13.109.57 
आयुष्यं प्राङ्मुखो भुङ्‍‍क्ते यशस्यं दक्षिणामुख:।
धन्यं पश्चान्मुखो भुङ्‍‍क्ते ऋतं भुङ्‍‍क्ते उदङ्मुख:॥ ५७॥
 
 
अनुवाद
जो व्यक्ति पूर्व की ओर मुख करके भोजन करता है, उसे दीर्घायु की प्राप्ति होती है, जो दक्षिण की ओर मुख करके भोजन करता है, उसे यश की प्राप्ति होती है, जो पश्चिम की ओर मुख करके भोजन करता है, उसे धन की प्राप्ति होती है तथा जो उत्तर की ओर मुख करके भोजन करता है, उसे सत्य की प्राप्ति होती है।
 
A man who eats facing east is blessed with a long life, one who eats facing south is blessed with fame, one who eats facing west is blessed with wealth and one who eats facing north is blessed with truth.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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